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Khayal

एक अकेलापन
      

        
    Ek roj jab mai rooth gya,
    Apne khyalon se chhot gya..

    Kaise rhuga bin apno ke,
    Ab to rishta mera,meri hawav se toot gya...

    Kuch behtar, kuch khash, thoda apne_pn ka ahsas,
    Mere ahsaso ki patang ka dohra manjha toot gya...

    Wo mndiro ki ghatiya,aazane masjido ki.
     Ek behtar kal ke aagose me, khubsurat pal ye chhot gya..

      Adhura  Khayal jab ghr se bahar jane ka aaya,
      mera poora bchpan mujhse rooth gya.....


 

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 IMRAN ALI
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