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नींद या ख्वाब

बचपन की दोस्ती थी, बड़े होने के बक़द तक चली.. लेकिन एक दिन अचानक से पता नही क्या हुआ कि किसी से भी बात करने का मन न किआ,सबकी कांटेक्ट डिलीट कर दी.. और ििइंतज़ार करने लगा, पता नही  किसका -लेकिन इंतजार तो करने लगा... घीरे-धीरे दिन, दिंनो से हफ्ते और हफ़्तों से महीने गुजर गए.. और फिर दो महीने बाद, अचानक से रातों रात ..............साल बदल गया, 2019 से 2020 में आ गया लेकिन इंतजार खत्म नही हुआ।     

बन्द आंखों की दुनिया : A dream with close eyes and open mind

घर के दोनों ओर कई पेड़ और इस मौसम में चलती ठंडी हवा, बड़ी सी छत में चारों ओर 3फुट की लंबी बाउंडरी के सामने से पूरा खुला हुआ मैदान मैदान ऐसा की नज़रे जहां तक जायगी नज़ारे ही नज़ारे है कोई अवरोध नही कोई विरोध नही.. बस आंख बंद करो और महसूस करो सामने अथाय समंदर, ऊपर उठती लहरे और उनपर कल कल की आती आवाजे.. ऊंची उठती लहरे और उठकर गिरती लहरे.... आज की बिखरी चांदनी में बादलों से आती हुई चांद की झिलमिल रोशनी.. अंधेरे में उजाले के फैले पैर और उस पर पानी की लहरों में चितर-बितर खेल करती मछलियों की  अनगिनत क्रियाएं.. किनारों की रेत में आगे बढ़ते हुए पानी की धीमी रफ्तार पेड़ों की जड़ो को स्पर्श करने की कोसिस करती हुई लहरें... वहीं एक ओर उसी तलछटी में भागते हुए अश्व जोड़े की आवाजें और उनकी क्रीड़ाएँ... ऐसे शांत मौसम में उनकी हिनहिनाने की तेज ध्वनि....न तो अकेले होने का प्रतीत होने दे रही है और न ही किसी के साथ होने का.. बात करने को कोई नही लेकिन बात करनी है.. बात वो करनी है जो किसी ने की नही बात उससे करनी है जो किसी से कह नही सकता.. इन मछलियों, लहरों, चारों ओर वृक्षों के समूहों में से कोई एक वृ...